बिहार में पारदर्शी तरीके से कदाचार मुक्त, सुगम एवं सुविधापूर्ण परीक्षाओं के लिए अत्याधुनिक सुविधायुक्त परीक्षा केंद्र बनाए जायेंगे. इसी क्रम में राजधानी पटना में 25 हजार क्षमता वाला परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा. अन्य तमाम जिला मुख्यालयों में भी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे ही परीक्षा केंद्र बनाए जायेंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ में परीक्षा परिसर की तैयारियों से संबंधित प्रेजेंटेशन देखने के बाद मेट्रो के एलाइनमेंट और आवागमन की सुविधा आदि का भी ध्यान रखने की सलाह दी. तमाम तरह की परीक्षाएं लेने में आ रही दिक्कतों को देखते हुए राज्य सरकार ने पटना सहित अन्य स्थानों पर अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित भव्य परीक्षा केंद्र बनाने का निर्णय लिया है. पटना में बनने वाले परीक्षा केंद्र की क्षमता 25 हजार 80 होगी. यहाँ ऑफलाइन एवं ऑनलाइन दोनों मोड में परीक्षा लेने की व्यवस्था होगी. ऑफलाइन के लिए 44 हॉल बनेंगे, जिनकी कुल क्षमता 20 हजार 680 और ऑनलाइन के लिए 4 हजार 480 क्षमता वाले कुल 20 हॉल बनेंगे. पूरे परिसर, भवन एवं हॉल में सीसीटीवी और जैमर लगेंगे तथा सभी हॉल में वेबकास्टिंग की सुविधा भी होगी. भवनों के ऊपर सोलर पैनल एवं एस्केलेटर की व्यवस्था के साथ ही 52 सिपाहियों के लिए बैरक तथा अन्य कर्मचारियों के लिए आवास की व्यवस्था भी होगी. पटना परीक्षा केंद्र गांधी सेतु से करीब सौ मीटर की दूरी पर 6.79 एकड़ जमीन पर बनेगा. इसके लिए 5.78 एकड़ जमीन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को स्थान्तरित हो चुकी है और शेष 1.11 एकड़ का प्रस्ताव पटना के जिलाधिकारी के पास भेजा जा चूका है, जिसमें तालाब है. मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरमजरुआ जमीन के ट्रांसफर में दिक्कत क्या है? तालाब का सौंदर्यीकरण कर उसके चारों ओर पर्याप्त पेड़ लगाएं जिससे परिसर हरा-भरा भी रहे. परिसर में घूमने के लिए पाथवे जरुर रहे और चारदीवारी निर्माण इस प्रकार हो ताकि परीक्षा में बाहर से गड़बड़ी करने की कोई सम्भावना न बचे. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष मैट्रिक, इंटर, डिप्लोमा इन एजुकेशन, औद्योगिक प्रशिक्षण, उच्च माध्यमिक स्तरीय (हिंदी एवं अंग्रेजी) परीक्षा, शिक्षक पात्रता एवं सिमुलतला आवासीय विद्यालय प्रवेश समेत कई परीक्षाएं ली जाती हैं. इनके अलावे बिहार लोकसेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, तकनीकी सेवा आयोग, बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता पर्षद, यूपीएससी, बैंकिंग, विभिन्न विश्वविद्यालयों- शिक्षण संस्थानों सहित अन्य परीक्षाएं आयोजित होती हैं. इन परीक्षाओं के लिए कई स्कूलों- कॉलेजों में केंद्र बनाए जाते हैं, जिससे वहाँ की पढ़ाई लगातार प्रभावित होती है. प्रश्नपत्र भेजने के लिए तथा उत्तर पुस्तिकाओं को वज्रगृह तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने के साथ ही विधि-व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में दंडाधिकारी एवं पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती है. इस बीच प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग होने का भी खतरा रहता है. बैठक में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, शिक्षा के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव मनीष कुमार वर्मा, अनुपम कुमार, परीक्षा समिति के आनंद किशोर सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे.
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