देश में 2020 से नया वित्त वर्ष लागू हो सकता है. मोदी सरकार अगर वित्त वर्ष बदलती है तो 152 साल से चली आ रही परंपरा एक इतिहास बन जाएगी. देश में अभी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक का वित्त वर्ष होता है. सरकारी बजट से लेकर RBI और अन्य तमाम वित्तीय संस्थान वित्तीय कामकाज में इसी कैलेंडर का प्रयोग करते हैं. बताया जा रहा है कि 2020 से वित्त वर्ष 1 जनवरी से 31 दिसंबर की हो सकती है. इसके पूर्व सरकार बजट पेश करने की तारीख में बदलाव कर चुकी है. पहले बजट 28 फरवरी को पेश किया जाता था, वहीं अब इसे 1 फरवरी को पेश किया जाना लगा है. वित्त मंत्रालय से जुड़ी वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में संसदीय समिति ने 2017 में सिफारिश की थी कि 1867 से जारी प्रथा को बदला जाए. समिति ने कहा कि वित्त वर्ष का समय 1 अप्रैल-31 मार्च के स्थान पर 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक लागू किया जाए. समिति ने सरकार से कहा कि अंग्रेजों के समय से शुरू की गई प्रथा को जल्द से जल्द बदला जाए. अगर वित्त वर्ष में बदलाव होता है तो आम आदमी के साथ-साथ सरकार के कार्य करने के तरीके में बदलाव हो जाएगा. बजट पेश करने की तारीख में बदलाव होगा, आयकर रिटर्न फाइल करने की तारीख और कंपनियों के वित्त वर्ष में भी बदलाव होगा. वित्त मंत्रालय के अलावा सभी मंत्रालयों को भी सारे खर्च 31 दिसंबर से पहले करने होंगे. राजीव गांधी की सरकार में एल के झा की अध्यक्षता में बनी समिति ने भी 1985 में वित्त वर्ष को बदलने का सुझाव दिया था, लेकिन तब इसको खारिज कर दिया गया था. अब नयी सिफारिश के आलोक में सरकार इसको बदलने का मन बना चुकी है. प्रधानमंत्री मोदी ने वित्त वर्ष में बदलाव करने के लिए जनता से भी सुझाव मांगे हैं. इसके लिए PM ने सरकार की वेबसाइट mygov.in पर एक फोरम शुरू किया है जिसमें आम जनता से टिप्पणी और सूचनाएं मांगी गई हैं. इसमें वित्त वर्ष के मूल्यांकन, कृषि, कारोबार और कर प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बताने के लिए कहा गया है.
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