सीबीआई के पूर्व निर्देशक आलोक वर्मा ने भले ही स्वेच्छया सेवानिवृत्ति ले ली है, लेकिन उनकी परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बिहार के एक समाजसेवी व्यंकटेश कुमार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आलोक वर्मा की अकूत संपत्ति की जांच एक विशेष टीम से करने की मांग कर दी है. व्यंकटेश कुमार शर्मा वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने पहली बार रेलवे होटल घोटाला उजागर किया था. शर्मा के अनुसार CBI के पूर्व निर्देशक आलोक वर्मा के खिलाफ देश के कई बड़े- बड़े कांडों के जांच को प्रभावित करने के आरोप लगे और हल ही में उनकी इतनी संपत्ति का खुलासा हुआ है जो आम आदमी की सोच से भी परे है. ज्ञात है कि पिछले दिनों बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी कहा था कि IRCTC मामले की जांच को CBI प्रभावित कर रहा है तथा इसके सबूतों के साथ भी छेड़छाड़ किया जा रहा है. श्री शर्मा ने ही एक सूचक के तौर पर CBI को इस मामले से जुड़े सारे साक्ष्य उपलब्ध कराये थे. शर्मा का आरोप है कि उन्होंने इस मामले से जुड़े जिन बहुत सारे साक्ष्यों को दिया था उनमें से बहुतेरे अभी तक CBI ने कोर्ट के सामने नहीं रखा है. इस मामले से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध होने के बाद भी जब CBI इस मामले की अनदेखी करती रही तो शर्मा द्वारा इसके बाद PIL के माध्यम से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पटियाला कोर्ट हाउस ने उन्हें इस मामले को निचली अदालत में क्रिमिनल कंटेंट के रूप में उठाने का आदेश दिया. कुछ महीने पहले CBI के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना ने अपने ही पदाधिकारी आलोक वर्मा पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़ी जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. CVC ने भी वर्मा द्वारा मीट व हवाला कारोबारी मोईन खान से दो करोड़ रुपये रिश्तव लेने का सूबूत पेश किया था. भ्रष्टाचार के कई मामले में संलिप्तता के आलोक में ही वर्मा को CBI के डायरेक्टर पद से हटाया गया है. आलोक वर्मा द्वारा अर्जित अकूत संपत्ति के संदर्भ में ज्ञात है कि देश के बैंकों के साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये लेकर भागने वाले विजय माल्या को भगाने और उसके खिलाफ जारी लुकआउट नोटिस कमजोर कराने का आरोप भी वर्मा पर ही है. देश का जाने-माने शराब कारोबारी माल्या एवं IRCTC मामले में आरोपी लालू यादव से वर्मा के व्यापारिक रिश्ते हैं क्या इसकी भी जांच जरूरी है. क्योंकि देश- विदेश में वर्मा के भी होटल कारोबार हैं. वर्मा का एक होटल लंदन के 85 ओकवूड कोर्ट, एबॉड्सबरी रोड स्थित हॉलैंड पार्क में भी है. आलोक वर्मा की संपत्ति और व्यवसाय जो अब तक सामने आये हैं, उनमें अकेले दिल्ली और नोएडा में ही पांच आलिशान मकान हैं. ये मकान भी किसी मामूली जगहों पर नहीं बल्कि पाश एरियों में हैं. इनका एक मकान दिल्ली के लुटियंस इलाका कहे जाने वाले पृथ्वी राज रोड पर है तो एक वसंत विहार में. एक घर ग्रेटर कैलाश में तो दूसरा विजेता विहार के दिल्ली पुलिस सोसायटी रोहिणी सेक्टर 13 में है. एक घर नोएडा के सेक्टर 134 जेपी ग्रीन स्थिथ पेंटाहाउस में भी है! वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों गीता वर्मा, नितिन वर्मा पवन कुमार वर्मा तथा रोहित वर्मा के नाम से कई कंपनियां चलती हैं. एक कंपनी सफदरजंग इन्क्लेव के बी-3-2/5 है. दूसरी कंपनी रॉयर हॉसपिटैलिटी तथा हेल्थ केयर है. इसके अलवा वसंत विहार में करीब चार, जनकपुरी, सैनिक फार्म, खानपुर आदि में भी उनकी कई कंपनियां चलती हैं, जिनमें वे और उनके परिवार के सदस्य डायरेक्टर बने हुए हैं. उनकी पत्नी और बेटे शराब के धंधे में भी हैं! बताया जाता है कि भ्रष्टाचार के आरोप में CBI के डायरेक्टर पद से हटाए गए आलोक वर्मा के पिता के खिलाफ भी करीब चार दशक पहले CBI ने आय से अधिक संपत्ति मामले में जांच कर चार्जशीट दायर किया था, जो मामला उनकी मौत के बाद खत्म हुआ!
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