केंद्र सरकार ने आयकर विभाग के रिटर्न की ई-फालिंग, जांच-पड़ताल और टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया को और त्वरित तथा सुगम बनाने के लिए एक नयी योजना को मंजूरी प्रदान कि है दी है. इससे आयकर रिटर्न (ITR) के प्रसंस्करण में मात्र एक लगेगा साथ ही रिफंड का काम भी और तेज गति से होगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयकर विवरण की ई-फालिंग, जांच-पड़ताल और टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया को और त्वरित तथा सुगम बनाने के लिए अगली पीढ़ी की प्रणाली लागू करने की एक योजना को बुधवार को मंजूरी दी है. इस 4,241.97 करोड़ रुपये की परियोजना का काम दिग्गज कंपनी इन्फोसिस को देने का निर्णय किया गया है. इस कदम से आयकर रिटर्न (ITR) प्रसंस्करण का समय घटकर एक दिन रह जायेगा और इससे रिफंड का काम भी और तेज हो जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आयकर विभाग की एकीकृत ई-फाइलिंग एंड सेंटरलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) 2.0 परियोजना के लिए 4,241.97 करोड़ रुपये के व्यय को मंजूरी दी. अभी ITR की जांच पड़ताल में लगभग 63 दिन का समय लगता है. इस परियोजना के क्रियान्वयन के बाद यह घटकर मात्र एक दिन रह जायेगा. यह नयी प्रणाली करीब डेढ़ वर्ष में तैयार होगी और तीन महीने तक परीक्षण के बाद इसे अंतिम रूप से लागू किया जायेगा. निविदा प्रक्रिया के बाद इन्फोसिस कम्पनी इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए चुनी गयी है. हाँलाकि मौजूदा प्रणाली भी सफल है परन्तु नयी परियोजना और अधिक अनुकूल होगी. CPC परियोजनाओं के तहत आयकर विभाग में समस्त प्रक्रियाओं का एंड टू एंड ऑटोमेशन किया जायेगा और इसके लिए विभिन्न नवोन्मेषी तरीकों का इस्तेमाल किया जायेगा. मंत्रिमंडल ने मौजूदा CPC-ITR 1.0 परियोजना के लिए 2018-19 तक 1,482.44 करोड़ रुपये की एकीकृत लागत को भी मंजूरी दे दी. चालू वित्त वर्ष में अभी तक 1.83 लाख करोड़ रुपये के टैक्स रिफंड जारी किये गये हैं. इस फैसले से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होने के साथ ही रिटर्न की तेजी से जांच हो सकेगी और रिफंड प्रक्रिया भी काफी तेज होगी.
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