भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतकर इतिहास रच दिया है. भारत को यह ऐतिहासिक जीत विराट कोहली की कप्तानी में मिली है. टीम इंडिया के 1932 में पहले टेस्ट कप्तान सीके नायडू बने थे, तब से आज तक भारतीय टेस्ट टीम को 33 कप्तान मिले. इनमें इकलौते कोहली को ही अपनी अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने का मौका मिला. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार मैच की सीरीज का आखरी टेस्ट ड्रा हो गया और इसके साथ ही भारत ने 71 साल के इतिहास में ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज 2-1 से जीत ली. इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया में सीरीज जीतने वाली इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बाद दुनिया की पांचवीं और एशिया की पहली टीम बन गयी. चार मैच की सीरीज के चौथे टेस्ट में भारत ने टॉस जीता और सिडनी में पहले बल्लेबाजी का फैसला कर सात विकेट पर 622 रन बना अपनी पहली पारी घोषित कर दी. ऑस्ट्रेलिया की टीम जब बल्लेबाजी करने उतरी तो भारतीय स्पिनर्स रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव की फिरकी में ऐसी फंसी कि तीसरे दिन केवल 236 रन पर ही 6 विकेट गंवा दिए. चौथे दिन बारिश और खराब रोशनी की वजह से केवल 25.2 ओवरों का खेल हो सका जिसमें टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को 300 रनों पर ही समेट कर 322 रन की ली़ड के साथ उसे फॉलोऑन खेलने पर मजबूर किया. लेकिन उसके बाद केवल 4 ओवर खेल हो सका कि बारिश ने मैच धो दिया, पांचवें दिन भी बारिश होती रही और भारत इस ऐतिहासिक जीत को 3- 1 में बदलने से चुक गया. महत्वपूर्ण बात है कि ऑस्ट्रेलिया को अपनी धरती पर पिछले 30 साल में पहली बार फॉलोआन के लिये उतरना पड़ा था. चेतेश्वर पुजारा ने 74.42 की औसत से सीरिज की 7 परियों में तीन शतक सहित 521 रन बनाए, उन्हें 193 रनों की पारी की बदौलत सिडनी टेस्ट में मैन ऑफ द मैच तथा इसके अलावा सीरिज़ में शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सीरीज भी चुना गया. पुजारा पहली बार किसी टेस्ट सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज चुने गए हैं. मैच जीतने के बाद कप्तान कोहली की स्पीच में उनकी निराशा साफ झलकी. उन्होंने कहा कि हम सीरीज जीतकर बहुत खुश हैं. लेकिन हम सब ये सीरीज़ 2-1 की जगह 3-1 से जीतना चाहते थे पर बारिश और खराब रोशनी की वजह से हम ऐसा नहीं कर सके और इससे हम निराश हैं परन्तु मौसम पर किसी का बस नहीं चलता. मैच के बाद कोच रवि शास्त्री एवं कप्तान विराट कोहली ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इसमें एक सवाल के जवाब में रवि शास्त्री ने विराट कोहली को सैल्यूट किया. एक पत्रकार ने रवि शास्त्री से पूछा कि लाला अमरनाथ, सुनील गावस्कर, सौरव गांगुली, महेंद्र सिंह धोनी जैसे कई कप्तानों ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया लेकिन जीत विराट को मिली, इस पर आप क्या कहेंगे? तो शास्त्री ने कहा कि- इतिहास बीती बात है, भविष्य रहस्य है. हम 71 साल में पहली बार सीरीज जीते हैं इसके लिए मैं अपने कप्तान को सैल्यूट करता हूँ जिनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराया. कोहली की देश के बाहर जीती गयी सीरिज़ में 2015 में 2-1 से श्री लंकाको, 2016 में 2-0 से वेस्ट इंडीजको, 2017 में 3-0 से श्रीलंका को, तथा 2018/19 में 2-1 से ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक जीत शामिल है. टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में 1947 में पहली टेस्ट सीरीज खेली थी, तब से अब तक वहाँ खेले 12 टेस्ट सीरीज में आठ सीरीज गंवाईं, तीन ड्रॉ किया और पहली बार सीरीज जीता है. यही नहीं ऑस्ट्रेलिया में उसने मात्र दूसरी बार सीरीज में दो टेस्ट जीते हैं. इसके पूर्व 1977-78 के पांच मैचों की सीरीज में दो टेस्ट जीते थे और तब ऑस्ट्रेलिया ने तीन टेस्ट जीतकर सीरीज पर कब्जा किया था. वैसे टीम इंडिया अब तक विदेश में 82 टेस्ट सीरीज खेली है, इसमें से वह 48 टेस्ट सीरीज हारी, 15 ड्रॉ कराई और सिर्फ 19 जीतने में सफल रही है. उसने विदेश में ऑस्ट्रेलिया के अलावे इंग्लैंड के खिलाफ 18, वेस्टइंडीज के खिलाफ 11, न्यूजीलैंड के खिलाफ 9, पाकिस्तान और श्रीलंका के खिलाफ 8-8, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 7, बांग्लादेश के खिलाफ 5 और जिम्बाब्वे के खिलाफ 4 टेस्ट सीरीज खेली है. साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यू जीलैंड और इंग्लैंड देशों (‘SENA’) में भारत द्वारा सीरीज जीतने की बात करें तो सबसे पहले 1967/68 में 3-1 से न्यूजीलैंड, 1971 में 1-0 से इंग्लैंड, 1986 में 2 से 0 से इंग्लैंड, 2007 में पुनः 1-0 से इंग्लैंड को, 2008/09 में 1-0 से न्यू जीलैंड और 2018/19 में 2-1 से ऑस्ट्रेलिया में भारत सीरिज जीत चूका है. पहली बार भारत 1947 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गया था, तब भारत के कप्तान लाला अमरनाथ पांच मैचों की इस सीरीज में 4 हार के साथ केवल एक मैच ड्रॉ करा पाये थे. चंदू बोर्डे की कप्तानी में 4 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने 1967 में ऑस्ट्रेलिया गयी भारतीय टीम को 4-0 से सीरीज गंवानी पड़ी थी. सीरीज में पहले मैच के बाद बाकी के तीन मैचों में नवाब पटौदी जूनियर ने कप्तानी की थी. 1977 में बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा काफी अच्छा रहा था. तब 5 टेस्ट की सीरीज में भारतीय टीम शुरूआती दो टेस्ट मैच हारने के बाद लगातार दो मैच जीती, हाँलाकि सीरीज 3-2 से हार गयी. सुनील गावस्कर की अगुवाई में भारतीय टीम ने 1980 में ऑस्ट्रेलिया में 3 टेस्ट मैचों की सीरिज 1-1 से ड्रा कराने में कामयाब रही. 1985 में कपिल देव की कप्तानी में भारतीय टीम ने सबसे ऊबाऊ सीरीज खेलते हुए 3 टेस्ट मैचों की सीरीज को 0-0 से ड्रॉ रखा था. मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारतीय टीम ने 1991-92 में यहां 5 टेस्ट मैच खेले, जिसमें से 4 में हारे. सचिन तेंदुलकर की अगुवाई में 1999-00 सीरिज़ के सभी 3 मैच भारतीय टीम हारी. पहली बार 2003-04 में सौरव गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जबरदस्त मुकाबला किया, हाँलाकि 4 मैचों की यह सीरीज 1-1 से ड्रा पर समाप्त हुयी. अनिल कुंबले की कप्तानी में भारतीय टीम ने 2007-08 में यहाँ 4 टेस्ट मैच खेली और 2-1 से हार कर लौटी. महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में भारतीय टीम 2011-12 में ऑस्ट्रेलिया से 4-0 से कारारी शिकस्त के साथ लौटी. धोनी की अगुवाई में पुनः 2014-15 में ऑस्ट्रेलिया गयी टीम को 2-0 से हार मिली. हाँलाकि इसी बीच तीसरे टेस्ट के बाद धोनी ने संन्यास ले लिया और चौथे टेस्ट में विराट कोहली ने कप्तानी की. 2018-19 में विराट कोहली की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया पहुंची टीम इंडिया ने इस बार ऑस्ट्रेलिया को उसकी ही धरती पर पूरी तरह से परेशान कर रखा और 2-1 से सीरीज अपने नाम किया. भारत ने एडीलेड में पहला टेस्ट मैच 31 रन से जीता. आस्ट्रेलिया ने पर्थ में दूसरे टेस्ट मैच को 146 रन से जीतकर बराबरी की लेकिन भारत ने मेलबर्न में तीसरा मैच 137 रन से जीत श्रृंखला में 2-1 की बढ़त बना ली जो आखिर में निर्णायक साबित हुआ. भारत ने बारिश के कारण चौथा टेस्ट मैच ड्रॉ छूटने के साथ ही ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट श्रृंखला जीतकर सोमवार को यहां नया इतिहास रच दिया. ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका ही दो ऐसी टीमें हैं जिन्होंने 9 अलग-अलग देशों में टेस्ट सीरीज जीती हैं. वहीं भारत और इंग्लैंड ने 8 देशों के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल की है. भारत ने साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड ने जिम्बाब्वे में टेस्ट सीरीज नहीं जीती है.
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