रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज राफेल की कीमत सदन में बताते हुए कहा कि यूपीए के वक्त एक बेसिक राफेल की कीमत 737 करोड़ थी, उसे NDA की सरकार ने 9% कम दर पर 670 करोड़ रुपए में लिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि इनकी (UPA) मंशा जहाज खरीदने की थी ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में होने के बावजूद इन्होंने इस डील को अटकाये रक्खा. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में राफेल डील पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए विमानों की संख्या के बारे में वास्तविक स्थिति बताई और कीमत के बारे में भी खुलासा करते हुए कहा कि- ‘‘इन्होंने (यूपीए सरकार ने) जब डील की थी, तब मात्र 18 विमान तैयार हालत में मिलने थे. बाकी 108 विमान 11 साल की अवधि में बनाए जाने थे. 2006 से 2014 तक 18 जहाज भी हासिल नहीं कर सके. हमने डील में फ्लाईअवे विमानों की संख्या कम नहीं की, बल्कि इसकी संख्या 18 से बढ़ाकर 36 कर दी. हमें इसी वर्ष सितंबर में पहला और 2022 तक आखिरी राफेल मिल जाएगा. यूपीए के वक्त एक बेसिक राफेल की कीमत 737 करोड़ थी. हमें यह 9% कम रेट पर 670 करोड़ रुपए में मिलेगा, सेब की तुलना संतरे से ना करें. रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि “मैं यहां तथ्य रख रही हूँ. आपकी मंशा जहाज खरीदने की थी ही नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में होने के बावजूद इन्होंने इस डील को अटकाया. आपने अगस्ता-वेस्टलैंड का ऑर्डर एचएएल को क्यों नहीं दिया? क्योंकि एचएएल आपको कुछ और दे नहीं सकती थी. आपने यह जानते हुए भी राफेल डील को अटका दिया कि वायुसेना परेशानी झेल रही है. रक्षा सौदे और सुरक्षा के लिए हुए सौदे में अंतर है. हम कोई रक्षा सौदा नहीं कर रहे हैं, यह सुरक्षा के लिए की गई डील है, क्योंकि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है. सीतारमण ने कहा कि “आपके 18 फ्लाईअवे जहाजों को हमने 36 तक पहुंचाया और बाकी जहाजों की खरीद के लिए भी हमने आरएफपी भेज दी है. जब भी कभी आपातकालीन खरीद की जाती है, तब यह केवल 2 स्क्वॉड्रन की होती है. 1982 में जब पाकिस्तान सोवियत यूनियन से एफ-16 खरीद रहा था, तब भारत सरकार ने फैसला किया था कि मिग-23 एमएफ की दो स्क्वॉड्रन लायक विमान खरीदे जाएंगे. 1985 में भी दो स्क्वॉड्रन बनाने लायक मिराज फ्रांस से खरीदे गए थे. 1987 में दो स्क्वॉड्रन लायक मिग-29 विमान सोवियत यूनियन से खरीदे गए थे. भारतीय वायुसेना आमतौर पर सरकार को यही सुझाव देती है कि दो स्क्वॉड्रन खरीदे जाएं, ताकि उनके लिए तत्काल व्यवस्था की जा सके. निर्मला ने तल्खी से कहा कि राफेल पर कांग्रेस का पूरा अभियान ही पूरी तरह से झूठ और गैरजिम्मेदार आरोपों पर आधारित था. 29 जनवरी को जनआक्रोश रैली में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि- यूपीए के समय एक राफेल 700 करोड़ रुपए का मिल रहा था. 28 जुलाई को संसद में 520 करोड़ रुपए कीमत बताई. 11 अगस्त को एक रैली में 514 करोड़ रुपए कहा और हैदराबाद में 526 करोड़ रुपए बताया. क्या इन्हें पता है कि ये किस बारे में बात कर रहे हैं? रक्षा मंत्री ने कहा- कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा था कि हम किसी राष्ट्र प्रमुख के साथ डिफेंस डील पर बात नहीं करेंगे, क्योंकि यह भारत का अंदरूनी मसला है. वहीं 28 जुलाई को संसद में राहुल गांधी जी ने कहा कि मैंने फ्रांस के राष्ट्रपति से गुप्त समझौते के बारे में बात की थी. यानी कांग्रेस प्रवक्ता कुछ और कह रहे हैं और कांग्रेस अध्यक्ष कुछ और बात कर रहे हैं. दोनों में से कोई एक तो देश को भ्रमित कर रहा है? रक्षा मंत्री ने कहा- एक वरिष्ठ संसद सदस्य ने वायुसेना प्रमुख को झूठा कहा, किसी चीज की हद होती है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के बारे में भी बहुत कुछ कहा, बस ये कहने से रह गए कि सुप्रीम कोर्ट ने सब गलत किया. एक वरिष्ठ नेता पाकिस्तान गए और कह रहे हैं कि मोदी सरकार को हटाने के लिए हमें मदद कीजिए. रक्षा मंत्री सीतारमण ने कहा- हमें 126 विमानों का बेसिक रेट 670 करोड़ रुपए का मिला, यह यूपीए के वक्त 737 करोड़ रुपए था, यानी हमारे वक्त बेसिक प्लेन 9% सस्ता मिला. बेसिक एयरक्राफ्ट के दाम की बैटल रेडी एयरक्राफ्ट से तुलना नहीं की जा सकती. राहुल गांधी सदन के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बेंगलुरु एचएएल गए थे और कहा था कि राफेल आपका अधिकार है, आपको इसे बनाना चाहिए था. खड़गेजी उस स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य भी थे, जिसने डिफेंस से जुड़े कई मामलों को देखा था और अपनी रिपोर्ट में कहा था कि- “कमेटी इस बात से निराश है कि 3 दशकों के बाद भी एचएएल वायुसेना की जरूरत के मुताबिक लड़ाकू विमान बनाने में सक्षम नहीं हो पाई”. आपने 2005 से 2014 के बीच एचएएल के लिए कुछ नहीं किया, हमने एक लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट एचएएल को दिए, आप सिर्फ घड़ियाली आंसू बहा रहे. जब राफेल कॉन्ट्रैक्ट हो रहा था, तब कहा गया कि एचएएल को यही जहाज बनाने में 2.7 गुना ज्यादा वक्त चाहिए. दैसो ने इस बात की गारंटी भी नहीं दी कि 108 विमानों को एचएएल प्रोड्यूस करे. रक्षा मंत्री ने कहा- रक्षा सौदे देश की सुरक्षा से जुड़े मामले हैं. देश यह समझता है कि रक्षा सौदे गोपनीय होते हैं. देश की सरहद पर संवेदनशील माहौल है. सरकार में जो भी है, उसे यह समझना होगा, जिम्मेदारी लेनी ही होगी. पिछले 10 साल में हमारे पड़ोसियों में क्या बदलाव हुए हैं? चीन के पास 400 लड़ाकू एयरक्राफ्ट हैं, इनमें फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट भी हैं. पाकिस्तान ने अपनी लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाई है और हमारे पास क्या है? 2002 में हमारे पास 42 स्क्वॉड्रन थी, यह 2007 में घटकर 36 और 2015 में 32 स्क्वॉड्रन हो गईं? हमारे पड़ोसी अपनी क्षमता बढ़ा रहे थे और इस दौरान हमारी क्षमता घट रही थी. चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से पूछा कि- जब मैं सदन में बोल रहा था, तब आपने कहा था कि मैं किसी का नाम नहीं ले सकता हूँ और आज रक्षा मंत्री मेरा नाम ले रही हैं. आप उन्हें तो मेरा नाम लेने दे रही हैं? तो स्पीकर ने कहा- ‘आप समझते तो हैं नहीं. मैंने सदन में मौजूद व्यक्ति का नाम लेने से मना नहीं किया था, आप यहां पर मौजूद हैं. आपको भी मौका दिया जाएगा और तब आप कह सकते हैं. इनका भाषण खत्म होने के बाद मैं आपको बोलने का मौका दूंगी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बाद में धमकाने के अंदाज़ में संसद भवन के बाहर मीडिया से कहा कि- ‘अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इस मामले की आपराधिक जांच होगी और दोषियों को सजा दी जाएगी,. अरुण जेटलीजी से कहना चाहता हूँ कि वे मुझे गाली देना बंद करें. मुझे गाली देने की बजाय वे राफेल पर हमारे द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दें.
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