वर्ष 2017-18 में खराब लोन देने के मामले में जिम्मेदार 6 हजार से ज्यादा बैंक अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन, अनिवार्य रिटायरमेंट और डिमोशन जैसी कार्रवाई हुई है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को संसद में दिए गए लिखित जवाब में बताया कि राष्ट्रीयकृत बैंकों से मिली जानकारियों के अनुसार इस अवधी में 6,049 अधिकारियों के खिलाफ खामियों की गंभीरता के आधार पर कार्रवाई की गई है. वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल के अनुसार खराब लोन की पहचान के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है. उसके चलते सभी कमर्शियल बैंकों के NPA मार्च 2018 में 9.62 लाख करोड़ हो गये हैं. बाद में यह राशि घटकर 9.43 लाख करोड़ हो गई. पब्लिक सेक्टर के बैंकों में इस साल की पहली छमाही में रिकॉर्ड 60,713 करोड़ की रिकवरी की गई है जो पिछले साल इसी समयावधि में की गई रिकवरी का दोगुना है. पंजाब नेशनल बैंक समेत 19 राष्ट्रीयकृत बैंकों को इस वित्त वर्ष के शुरुआती 6 महीनों में लगभग 21,388 करोड़ का घाटा हुआ है जबकि घाटे की यह राशि इसी समयावधि में पिछले साल 6,861 करोड़ थी. शुक्ल ने सदन में बताया कि इस वित्त वर्ष में आयकर विभाग ने 582 जांच और छापों के दौरान 992.52 करोड़ की संपत्तियां सीज की हैं. 2016-17 में यह राशि 14,69.62 करोड़ थी. 2018-19 के दौरान अप्रैल से अक्टूबर के बीच जीएसटी चोरी के 6,585 मामलों में 38,896 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी पकड़ी गयी है.
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