पूरे बिहार के 143 नगर निकायों में से 134 ओडीएफ किए हो चुके हैं. प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रचार प्रसार में संस्थाओं को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. साथ ही ठोस कचरा प्रबंधन की दिशा में सार्थक प्रयास कर हम वेस्ट को वेल्थ में बदलने के साथ ही असंगठित क्षेत्र के कामगारों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है. दलित विकास अभियान समिति और आईजीएसएसएस के संयुक्त तत्वावधान में ए0 एन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, पटना के सभागार में शहरी गरीबों को बुनियादी सुविधाओं उपलब्ध कराने हेतु एकदिवसीय परामर्श बैठक में यह विचार निकलकर आया. विषय प्रवेश कराते हुए धमेंद्र कुमार ने प्रस्तुति के माध्यम से शहरी गरीबों से जुड़ी समस्याओं को सभी के साथ साझा किया. जिसमें घरों से लेकर उनकी बुनियादी सुविधाओं के संदर्भ में विस्तुत आंकड़े भी पेश किए गए. कार्यक्रम की शुरुआत अनुसूचित जाति के पूर्व अध्यक्ष विधानंद विकल, आईजीएसएसएस के कार्यक्रम पदाधिकारी अरविंद उन्नीयन, प्रिया के वरिष्ठ कार्यक्रम पदाधिकारी विकास कुमार सिंह, दलित विकास अभियान समिति के धमेंद्र कुमार, असंगठित क्षेत्र के विजयकांत सिन्हां, विश्वरंजन और गंगा स्वच्छता मंच के सुदामा सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया. स्वच्छ भारत मिशन के स्टेट हेड अनिल कुमार गुप्ता और उनकी सहयोगी रानी चौबे ने पूरे बिहार में शौचालय के क्षेत्र में चले रहे प्रयासो के बारे में आकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रदेश की 143 नगर निकायों में से 134 ओडीएफ किए जा चुके हैं. उन्होने प्लास्टिक बैन के संदर्भ में पूरे सदन को जानकारी देते हुए इसमें हरसंभव सहयोग की अपील करते हुए कहा कि प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रचार प्रसार और इनको लेकर बहुत सारे उपलब्ध संसाधनों के वितरण में संस्थाओं को अपनी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने जानकारी दी कि ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर भी काफी काम हो रहे हैं. इस कचरे का सही प्रबंधन किया जाए तो इसे वेल्थ में बदला जा सकता है. साथ ही बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र के कामगारों का क्षमता वर्द्धन कर उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जा सकता है. विधानंद विकल ने कहा कि शहरी क्षेत्र में काफी काम हो रहा है. 2005 की अपेक्षा अब तक काफी बदलाव देखने को मिले हैं. उन्होंने नगर विकास एवं आवास विभाग से अपील किया कि संस्थाओं को अपने साथ जोड़ मिशन मोड में कार्यारम्भ करने की जरूरत है. उन्होंने नगर विकास विभाग को प्रस्ताव दिया कि राज्य में जहां भी स्लम है उसे उजाड़ने के बजाय वहीं उन्हें बसाने के लिए लीगल पेपर या पटटा उपलब्ध कराया जाए. अरबन एक्सपर्ट विश्वरंजन ने योजनाओं के विकेंद्रीकरण, भागीदारी और ईगवर्नेंस पर जोर देते हुए कहा कि योजनाएं और उससे जुड़े हुए बजट पब्लिक डोमन में आयें. साथ ही नए मैकेनिज्म विकसित करने की जरूरत है ताकि अपनी बात आवाम सरकार तक पहंचा पाये. शहर को बेहतर बनाने के लिए पब्लिक टांसपोर्ट सिस्टम को बढ़ाना होगा. प्रिया के विकास सिंह ने कहा कि शहरी गरीबों के समस्याओं के जिम्मेदार आज हम स्वयं हैं. हमारी निष्क्रियता आज स्मार्ट सिटी के रूप में हमारे सामने है. इसके मूल कारणों को समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर शहरी गरीब वो हैं जो गांव से शहर की ओर रोजगार और नए अवसर की तलाश में आते हैं और फिर शुरू हो जाती है उनकी समस्याओं की फेहरिस्त. जरूरत स्मार्ट सिटी की जगह स्मार्ट विलेज बनाने की है. अरविंद उन्नयन ने कहा कि शहरीकरण की पालिसी चल रही है, लेकिन वह पीपुल फ्रेंडली नहीं है. हमें शहर और बस्ती तो चाहिए लेकिन मलीन नहीं. इसके साथ ही नगर आवास विभाग से मुकेश ने सभी के लिए आवास पर एक प्रस्तुती देते हुए वर्तमान स्थिति पर चर्चा की. सुरेश सिन्हा ने ठोस कचरा प्रबंधन पर अपनी प्रस्तुती देकर तकनीकी रूप से यह समझाया कि कैसे हम घरों मे ही कचरा प्रबंधन कर सकते हैं. बैठक के अंत में एक सिटीजन एक्शन ग्रुप का गठन किया गया जो शहरी गरीबों के हक की लड़ाई के रुपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए बारह जनवरी को बैठक करेगी. दलित विकास अभियान समिति के निदेशक धर्मेन्द्र कुमार को इसकी जिम्मेवारी सौंपते हुए कार्यक्रम समाप्त हुआ.
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