देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह सिर्फ भारत के एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर ही नहीं, थे, बल्कि देश के एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी थे. साथ ही सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मीडिया से बात न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा. मैं लगातार प्रेस से मिलता रहता था और हर विदेश यात्रा के बाद प्रेस कांफ्रेंस करता था. दिल्ली में अपनी पुस्तक ‘चेंजिंग इंडिया’ के लॉन्च के अवसर पर उन्होंने कहा कि मुझे देश के एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री के रूप में जाना जाता है, लेकिन मुझे लगता है कि मैं एक एक्सीडेंटल वित्त मंत्री भी था. जब 1991 में मैं भारत के वित्त मंत्री था तो संकट को “महान अवसर” में बदलने में सफल रहा. मेरा जीवन एडवेंचर और जोखिम भरा रहा है, जिसे मैं पसंद करता हूं. मुझे कोई पछतावा नहीं है. मुझे इस देश ने जो दिया है, उसे मैं कभी वापस नहीं कर पाऊंगा. जीवन के कुछ समय काफी स्मूथ रहे हैं और कुछ उतार-चढ़ाव वाले भी. पीसी एलेक्जेंडर ने जब मुझे बताया था कि PM राव मुझे वित्त मंत्री बनाना चाहते हैं, तो विश्वास ही नहीं हुआ था. उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी. मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीजें हुई हैं, वे पांच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक ताकत बनने वाला है. पूर्व प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर मीडिया से बात न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा. मैं ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था जो प्रेस से बात करने में डरता हो. मैं लगातार प्रेस से मिलता रहता था और हर विदेश यात्रा के बाद प्रेस कांफ्रेंस करता था. उन्होंने मोदी पर जमकर निशाना साधते हुए बयान ऐसे समय में दिया है, जब कुछ ही दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाया है. पूर्व PM ने कहा कि लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी. मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीजें हुई हैं, वो पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक ‘चेंजिंग इंडिया’ में UPA सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में दस वर्षो के कार्यकाल, तथा एक अर्थशास्त्री के रूप में हमारे जीवन के विवरण शामिल हैं. मनमोहन ने अपने तमाम विदेश दौरे के बाद किये संवाददाता सम्मेलनों को भी इस पुस्तक में वर्णित किया है. मनमोहन ने कहा कि भारत एक प्रमुख आर्थिक वैश्विक शक्ति बनने वाला है. उन्होंने विक्टर ह्यूगो का उद्धरण देते हुए कहा कि “एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है और धरती पर कोई भी ताकत इस विचार को रोक नहीं सकती.” मनमोहन ने 1991 में तत्कालीन वित्तमंत्री के रूप में अपने बजट भाषण के दौरान भी विक्टर ह्यूगो का उद्धरण पेश किया था. सिंह ने कहा कि वह भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभालने वाले एक बड़े पावर हाउस के रूप में देखते हैं. वर्ष 1991 से ही भारत की औसत विकास दर करीब सात प्रतिशत ही रही है. तमाम कठिनाइयों और रुकावटों के बावजूद भारत विश्व की अर्थव्यवस्थाओं का पावरहाउस बन जाएगा. RBI के पूर्व गवर्नर रह चुके मनमोहन सिंह ने ‘चेंजिंग इंडिया’ लॉन्च के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि हर किसी को RBI की स्वायत्तता और स्‍वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए. सरकार और RBI के बीच रिश्‍ते पति-पत्‍नी की तरह होते हैं. इस रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव और मतभेदों के बावजूद अंतत: इसे सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया जाना चाहिए. दोनों के बीच मतभेदों को निपटाना जरूरी होता है ताकि दोनों सामंजस्य के साथ काम कर सकें. हमें सशक्त और स्वतंत्र RBI की आवश्यकता है जो केंद्र सरकार के सहयोग से काम करे. उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब रिजर्व बैंक के आरक्षित धन के स्तर तथा लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए कर्ज के नियम आसान बनाने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्रीय बैंक तथा वित्त मंत्रालय के बीच मतभेदों की चर्चा के बीच उर्जित पटेल ने आरबीआई के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया. आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव तथा नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था के सामान्यीकरण की अगुआई करने वाले शक्तिकांत दास को रिजर्व बैंक के गवर्नर बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि जिसे भी यह पद दिया गया है, मैं उसके अच्छे की प्रार्थना करता हूँ.
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