चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन स्कीम के आश्रितों को पेंशन देने के लिए आश्रितों की सूची में परिवर्तन करने पर विचार कर केंद्र सरकार द्वारा शपथ पत्र दायर करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि लाभ को सीमित नहीं किया जा सकता है. स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन स्कीम के तहत आश्रितों की सूची में बेटों व अन्य कानूनी वारिसों को शामिल न करने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिपण्णी करते हुए कहा कि इस स्कीम के लाभ को सीमित नहीं किया जा सकता है. हाईकोर्ट ने केंद्र को आश्रित परिभाषा में विस्तार की स्थिति पर विचार करने का आदेश देते हुए कहा कि सभी कानूनी वारिसों को स्कीम का लाभ देने के लिए पीआईएल बेंच की आबजर्बेशन का पालन करते हुए इस दिशा में विचार कर दोबारा हलफनामा दाखिल किया जाए. मलविंदर सिंह ने 2012 में याचिका दाखिल करते हुए मांग किया था कि स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन स्कीम के तहत आश्रितों की सूची में सभी कानूनी वारिसों को रखा जाए. कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवायी के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्कीम के तहत आश्रितों की सूची को केवल अविवाहित एवं बेरोजगार बेटी परिजनों तक सीमित कारण इस पेंशन स्कीम के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया थे कि इस ऑब्जिवेशन के अनुसार आश्रितों की सूची में परिवर्तन करें. कोर्ट ने कहा था कि अब तक शायद ही किसी स्वतंत्रता सैनिक के परिजन जिंदा होंगे साथ ही अविवाहित व बेरोजगार बेटी की संभावना भी न के बराबर है. मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि यह स्कीम 1972 में आरम्भ की गई थी और समय-समय पर इसमें कई परिवर्तन भी हुए हैं. इस स्कीम का स्कोप काफी बढ़ चुका है और ऐसे में आश्रितों को पेंशन देने के लिए आश्रितों की सूची में परिवर्तन करने कि संभावना न के बराबर है. इस पर मामले में अवमानना याचिका दाखिल की गई. याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया यह रवैया अवमानना के तहत आता है. कोर्ट ने अब केंद्र सरकार को दोबारा विचार कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.केन्द्रीय गृह मंत्रालय की एमिनेंट कमिटी के सदस्यों ने भी इस संदर्भ में हाई कोर्ट को अपने विचारों से अवगत कराया था. आल इंडिया फ्रीडम फाइटर समिति के अध्यक्ष एन आर माथड़ ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आदेश के आलोक में जल्द से जल्द केंद्र सरकार को विषय के पक्ष में शपथ पत्र दाखिल करना चाहिए. अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण परिषद् के अध्यक्ष नित्यानंद शर्मा ने कोर्ट के आदेश को मिल का पत्थर बताते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश के आलोक में एक कमिटी गठित कर नीति निर्धारित होनी चाहिए. शर्मा एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व० नवल किशोर तिवारी के पुत्र भूतपूर्व सैनिक मुरारी तिवारी ने कहा कि सबको यह सुविधा देना भी गलत होगा, सिर्फ जरूरत मंद परिवारों को इसकी सुविधा मिलनी चाहिए.
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