उत्तर प्रदेश का बाघपुर जोगी डेरा गांव एक ऐसा गाँव है, जहाँ का बच्चा- बच्चा उन विषैले साँपों से खेलता है जिन्हें देख भर लेने से अच्छे- अच्छों के पसीने छूटने लगते हैं. भारत कभी सांप- सपेरों के देश के तौर पर पूरी दुनिया में जाना जाता था. परन्तु अब तो देश के कुछ ही हिस्सों में गिने- चुने सपेरे पाये जाते हैं. परन्तु उत्तर प्रदेश में ऐसा ही एक गांव है बाघपुर, जोगी डेरा, जहां के अधिकत्तर लोग आज भी सपेरे हैं. इनका मुख्य व्यवसाय ही सांप पकड़ने का है. हाँलाकि बदलते वक़्त के साथ अब ये लोग भी धीरे-धीरे अपना खानदानी व्यवसाय छोड़ रहे हैं. यह गांव भी शायद कुछ समय बाद इतिहास बन जाये. पर अभी तक यहाँ के बच्चे- बूढ़े सभी सांपों के साथ ही खेलते हैं, खाते हैं और रहते हैं. संभवतः सपेरों की यह आख़िरी पीढ़ी साबित हो, जो रात- दिन सांपों के साथ खेलते, खाते और रहते हों. इस गाँव के ऋषि नाथ, आशिक नाथ और रवि नाथ का भी कहना है कि शायद सपेरों की अब आख़िरी पीढ़ी सामने बची है. ये बच्चे जो अभी भयानक से भयानक जहरीले साँपों के साथ दिन- रात रहते हैं, बड़े होने पर शायद ही साँपों के साथ नजर आवें. pileekhabar.com का मानना है कि संपेरों के विलुप्त होते जा रहे इस प्रजाति को संरक्षण और आवश्यक पोषण देने की आवश्यकता है, ताकि यह विधा और ज्ञान संरक्षित रखी जा सके. देश के चिड़ियाघरों (Botional Garden) और पार्कों में इन्हें नौकरी देने में प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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