लालू-शहाबुद्दीन के बीच हुई बातचीत का टेप सामने आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। लालू-शहाबुद्दीन के बीच हुई बातचीत का टेप वायरल होने के बाद विपक्ष के लगभग सभी नेता लालू यादव के साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी कई तरह के सवाल उठा रहे हैं। बिहार की राजनीति में एकाएक आये इस मोड़ के बीच नीतीश कुमार ने जांच का आदेश देकर विवाद को शांत करने का प्रयास किया है। लालू प्रसाद पर कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के कई वरिष्ठ नेता राजभवन भी गये थे। जब से मामला सामने आया तब से बस लालू-शहाबुद्दीन के रिश्ते की चर्चा ही राजनीतिक गलियारों में होती रही। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के DGP डीके ठाकुर को बुलाकर इसकी जांच करने का आदेश जारी कर दिया। सीवान जेल से शहाबुद्दीन द्वारा लालू प्रसाद से बातचीत करने के वायरल टेप ने प्रदेश में कानून व्यवस्था और जेल की सुरक्षा की पोल खोल दी। बिहार के बाहुबली पूर्व सांसद शाहबुद्दीन पिछले साल सीवान जेल से भागलपुर जेल भेज दिए गए थे जहां उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई और वह बाहर निकले। लेकिन उनके जेल से बाहर आने के बाद उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और वो फिर से सीवान जेल में कैद हो गए। जहां से उन्हें 17 फरवरी को तिहाड जेल भेज दिया गया था। मामला सामने आने के बाद से लालू यादव पूरे परिवार के साथ खामोश हैं। ना तो उनके दोनों मंत्री बेटे का इस मामले पर कोई जवाब आया है और ना ही सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का।
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